यह किसने कह दिया तुमसे के हार गए है हम
मोहब्बत में लुटाने के लिए तो अभी जान बाक़ी है"
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भोले की नगरी काशी
हर हर महादेव इन थोड़े से शब्दों में काशी को परिभाषित नहीं किया जा सकता , परन्तु बनारस की एक झलक प्रस्तुत करने की मैंने अपनी ...
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लोगों ने रोज़ ही नया कुछ माँगा खुदा से..! एक हम ही हैं तेरे ख्याल से आगे न गये..!"
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मोहन काका डाक विभाग के कर्मचारी थे। बरसों से वे माधोपुर और आस पास के गाँव में चिट्ठियां बांटने का काम करते थे। एक दिन उन्हें एक चिट्ठी मि...
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“बोलने से पहले 'शब्द' इंसान के गुलाम होते हैं . . . लेकिन बोलने के बाद 'इंसान' शब्दों का गुलाम बन जाता हैं!:
ab nahi rahegi
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